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इतिहास का प्रतिबिंब लापता, प्रशासन मौन, रानी बाग की पहचान खतरे में!

निगरानी में भारी लापरवाही उजागर,विरासत संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल

रानी बाग के प्राचीन शीशे रहस्यमय तरीके से गायब  विरासत की अनदेखी या सुनियोजित चोरी?

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क/मनोज कुमार सोनी। जयपुर राजधानी जयपुर के ट्रांसपोर्ट नगर से गलता जी की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित रानी का बाग, जो अपनी ऐतिहासिक और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है, इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।स्थानीय लोगों के अनुसार, रानी बाग के प्रवेश द्वारों पर लगे पुराने एंटीक शीशे (Antique Mirrors) रहस्यमय तरीके से गायब हो गए हैं। ये शीशे कई दशकों पुराने थे और राजशाही काल की वास्तुकला के अवशेष माने जाते थे।

प्राचीन इतिहास में दर्ज रानी का बाग जयपुर की स्थापत्य विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।माना जाता है कि यह बाग कभी शाही परिवार की महिलाओं के विश्राम स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। उस दौर में गाड़ियों और रथों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए प्रवेश द्वारों के दोनों ओर विशेष कोण पर लगे शीशे लगाए गए थे, ताकि अंदर-बाहर जाने वालों की सुरक्षा और गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके।समय के साथ भले ही इस जगह का रूप बदल गया हो, पर ये शीशे इतिहास की जीवंत निशानी थे।  पास के दुकानदारों और निवासियों का कहना है कि इन शीशों का अस्तित्व पिछले कई वर्षों से था, लेकिन पिछले कुछ दिनों में अचानक गायब हो गए।

“रात के समय किसी ने इन्हें निकाल लिया होगा, ये बहुत पुराने और महंगे शीशे थे। पहले ये इतनी चमकदार थे कि गाड़ी का प्रतिबिंब दूर से दिख जाता था।” कई लोगों का मानना है कि यह छोटे पैमाने पर की गई चोरी हो सकती है, जिसमें किसी को इस जगह की ऐतिहासिक महत्ता का अंदाजा नहीं था।

प्रशासनिक अनदेखी जब इस विषय पर RSC होम गार्ड के कुछ कर्मचारियों से बात की गई, जो वर्तमान में परिसर की निगरानी करते हैं, तो किसी के पास स्पष्ट जवाब नहीं था।
एक ने कहा कि “हमें तो जानकारी ही नहीं थी कि शीशे गायब हो गए हैं,” दूसरे ने कहा शायद किसी ने तोड़ दिए होंगे, रात में कोई आवाज नहीं सुनी।”

यह जवाब सुनकर यह सवाल उठता है कि जब इतने प्राचीन अवशेष खुलेआम गायब हो जाएं और पहरेदारों को खबर तक न हो, तो निगरानी व्यवस्था किस हद तक प्रभावी है?

और भी हैरानी की बात यह है कि पुरातत्व या नगर निगम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले की कोई औपचारिक सूचना अब तक नहीं दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, रानी बाग जयपुर नगर निगम (हेरिटेज जोन) के अधीन आता है, लेकिन वहां किसी भी प्रकार की रिपोर्ट या लिखित शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई है।
यह दर्शाता है कि विरासत की सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता की भारी कमी है।

स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, इन शीशों की कीमत लाखों रुपये में हो सकती है। कहा जाता है कि यह शीशे बेल्जियम और ईरान से विशेष रूप से मंगवाए गए थे, और इन्हें राजशाही काल में हाथ से जड़ी पीतल की बॉर्डर में जड़ा गया था। आज के समय में इस तरह के शीशे अत्यंत दुर्लभ हैं।

इतिहासकार डॉ. आर. एल. शर्मा के अनुसार, “यह न केवल एक वस्तु की चोरी है बल्कि हमारे सांस्कृतिक इतिहास का हिस्सा खो जाने जैसा है। जयपुर की पहचान उसकी विरासत और स्थापत्य में ही है, और इस तरह की घटनाएं चिंताजनक हैं।”

स्थानीय निवासियों की अपील रानी बाग के आस-पास रहने वाले लोगों ने जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग से मांग की है कि इस मामले की सघन जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि

परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं,रात के समय गश्त बढ़ाई जाए,और सभी ऐतिहासिक हिस्सों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी क्षति का तुरंत पता लगाया जा सके।

प्राचीन संरचनाओं की उपेक्षा का प्रतीक यह घटना केवल रानी बाग तक सीमित नहीं है। जयपुर में कई पुराने स्मारक, बाग और हवेलियां ऐसी हैं जिनकी निगरानी व देखभाल के अभाव में धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो रही हैं। विरासत विशेषज्ञों का मानना है कि “विरासत केवल इमारतों की नहीं, बल्कि उसमें जड़े हर तत्व की होती है चाहे वह दरवाज़ा हो, झरोखा हो या एक छोटा सा शीशा।”

प्रशासन की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा इस खबर के प्रकाशन तक संबंधित विभाग से कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, नगर निगम हेरिटेज विंग इस प्रकरण की प्रारंभिक जानकारी जुटाने में लगी है और जल्द ही एक फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट तैयार की जा सकती है।

रानी बाग के ये शीशे केवल कांच के टुकड़े नहीं थे, बल्कि जयपुर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा थे।
उनका यूं गायब हो जाना इस बात का संकेत है कि हम अपने अतीत की रक्षा में कितने लापरवाह हो गए हैं।
अगर ऐसे मामलों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियां केवल तस्वीरों और कहानियों में ही अपनी विरासत को देख पाएंगी।

क्राइम इंडिया टीवी के कैमरे द्वारा ली गई तस्वीर में साफ दिखाई देता है कि जहां पहले बड़ा एंटीक शीशा लगा था, वहां अब केवल खाली लाल फ्रेम बचा है।

यह फ्रेम सड़क के किनारे, रानी बाग के मुख्य द्वार के समीप स्थित है, जिससे अंदर-बाहर आने वाली गाड़ियों को देखा जाता था। लेकिन अब यह विरासत का हिस्सा केवल “खाली बॉक्स” बनकर रह गया है।

पास से गुजरने वाले लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले तक इसमें शीशा मौजूद था, पर अब किसी को नहीं मालूम कि वह कहां गया।गौर करने वाली बात यह है कि RSC होम गार्ड की ड्यूटी वहीं तैनात थी, फिर भी किसी ने चोरी या क्षति की सूचना नहीं दी।

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