प्रशासनप्रशासनिक समाचारराजनीतिराजनीतिकराष्ट्रीय

लोकतंत्र का उत्सव: बिहार की मिट्टी में उमड़ा मतदान का ज्वार

सुबह की पहली किरण जब गंगा किनारे की घाटियों को सुनहरी आभा से नहलाने लगी, तब बिहार के गाँवों और कस्बों की गलियों में कुछ खास हलचल थी। लोग अपने-अपने घरों से निकल रहे थे — कोई नई साड़ी में, कोई लाठी टेकते हुए, तो कोई पहली बार वोट डालने का जोश लिए। यह किसी साधारण दिन की चहल-पहल नहीं थी; यह था लोकतंत्र का पर्व, जिसे बिहार ने पूरे हृदय से मनाया।

बिहार चुनाव 2025 के पहले चरण में 64.66 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, बल्कि उस जागरूकता का प्रतीक है, जो वर्षों की लोकतांत्रिक यात्रा में पनपी है।

हर गाँव के चौक पर चर्चा थी — “किसे दें वोट?”, “कौन करेगा विकास?” और “इस बार बदलाव लाना है।” बूथों के बाहर लंबी कतारों में खड़े चेहरे उम्मीद से भरे थे। कहीं कोई बुज़ुर्ग अपनी उँगली पर स्याही लगवाकर गर्व से मुस्कुरा रहा था, तो कहीं पहली बार वोट देने वाली युवती मोबाइल पर सेल्फी ले रही थी — “पहला वोट, देश के नाम।”

इस चुनाव में सिर्फ मतदाताओं की नहीं, बल्कि पूरे प्रशासन की तैयारी दिखी। 4 लाख से अधिक कर्मियों की तैनाती, 100% वेब-कास्टिंग, महिलाओं के लिए विशेष सुविधा केंद्र, और दिव्यांगों के लिए ई-रिक्शा सेवा — सब कुछ मानो यह कह रहा था कि लोकतंत्र अब केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक उत्सव है।

जब शाम को मतदान समाप्त हुआ, तो सूरज ढल रहा था, लेकिन चेहरे पर जो चमक थी, वह नए सवेरे की उम्मीद की तरह थी।
यह चुनाव किसी दल का नहीं, किसी उम्मीदवार का नहीं — बल्कि बिहार के जागरूक मतदाता का था, जिसने साबित किया कि जब जनता जागती है, तो इतिहास बनता है।

Related Articles

Back to top button