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‘झुग्गियों में सुविधा बढ़ाने के लिए 700 करोड़ दिए’, CM रेखा गुप्ता का आरोप- पिछली सरकारों ने सिर्फ राजनीति की

दिल्ली की झुग्गियों में सुविधाएँ बढ़ाने के लिए 700 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस अवसर पर, सीएम रेखा गुप्ता ने पिछली सरकारों पर केवल राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने गरीबों के लिए कुछ नहीं किया, जबकि वर्तमान सरकार झुग्गीवासियों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस आवंटन से झुग्गी क्षेत्रों में विकास कार्य किए जाएंगे।

HighLights

  1. दिल्ली झुग्गी विकास के लिए 700 करोड़ रुपये आवंटित
  2. सीएम गुप्ता ने पिछली सरकारों पर लगाए आरोप
  3. झुग्गीवासियों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने का संकल्प

लाजपत नगर स्थित नेहरू नगर में कैंटीन शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछली सरकारों ने झुग्गियों के नाम पर राजनीति की और डूसिब (दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड) को कमजोर करने का काम किया।

पिछली सरकार की ओर से 31 मार्च की रात को डूसिब के खाते में 100 करोड़ ट्रांसफर कर दिए जाते थे और 12 बजे बजट खत्म हो जाता था। परिणाम यह हुआ कि झुग्गियों में न पानी पहुंचा, न शौचालय बने। हमने डूसिब को 700 करोड़ रुपए का बजट दिया है और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि झुग्गियों में शौचालयों के साथ बहनों के लिए स्नानगृह भी सम्मानजनक तरीके से बनाए जाएं।

आप सरकार बनते ही बंद हुई थी जन आहार योजना

वर्ष 1998 से 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित रहीं। उन्होंने 2010 में ”जन आहार योजना” नाम से ऐसी ही योजना शुरू की थी। इसमें 15 रुपये में भोजन दिया जाता था, जिसमें छह पूरी या चार रोटी, 400 ग्राम चावल, सब्जी, दाल या राजमा या छोले, दही या रायता और पीने का एक ग्लास पानी मिलता था।

समय के साथ 15 रुपये को बढ़ाकर शुल्क 18 रुपये कर दिया गया था। आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने पर इसका नाम बदलकर ”आम आदमी कैंटीन योजना” शुरू करने की योजना बनी। प्रस्ताव था कि पांच या 10 रुपये में खाना दिया जाएगा। हालांकि आम आदमी पार्टी के दस वर्ष से अधिक के कार्यकाल में यह योजना कभी धरातल पर उतर ही नहीं पायी।

गौतम गंभीर ने की थी जन रसोई की शुरुआत

पूर्वी दिल्ली से सांसद बनने पर गौतम गंभीर ने अपने क्षेत्र में गांधी नगर में 24 दिसंबर 2020 को जन रसोई की शुरुआत की थी, जहां लोगों को एक रुपये में भोजन मिलता था। इसके बाद उन्होंने गणेशपुर, शकरपुर में भी ऐसी ही कैंटीन खोली।

रोजाना लगभग 1000 लोग खाना खाने के लिए पहुंचते थे। एक थाली में पर्याप्त मात्रा में चावल, दाल, सब्जी और सलाद दिया जाता था। जन रसोई का प्रबंधन गौतम गंभीर फाउंडेशन की ओर से किया जाता था। राजनीति से उनके हटने के बाद से जन रसोई बंद है।

एमसीडी ने पहले भी खोली थी कैंटीन

पूर्वकालिक दक्षिणी और उत्तरी निगम ने अटल आहार केंद्र खोले थे। इसमें दस रुपये गरीबों को खाना खिलाने की बात थी। वर्ष 2017 में इसे तत्कालीन महापौर कमलजीत सहरावत ने शुरू किया था। वह भी अटल बिहारी बाजपेयी की जन्मतिथि पर। पर योजना करीब सात से आठ माह तक चली लेकिन निगम की खराब आर्थिक स्थिति के कारण एनजीओ को भुगतान नहीं हो पाया तो योजना बंद हो गई।

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