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साध्वी प्रेम बाइसा की मौत मामले में SIT गठित, लोगों से पूछताछ जारी, सोनम वांगचुक की एम्स में हुई जांच; पढ़ें अन्य खबरें

जोधपुर में कथावाचक साध्वी प्रेम बाइसा की मौत की जांच के लिए पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश पासवान ने एसीपी छवि शर्मा के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया है। एसआइटी में साइबर एक्सपर्ट, महिला कांस्टेबल, दो थानेदार समेत कुल 9 लोग हैं। सूत्रों के अनुसार, साध्वी प्रेम बाइसा की मौत के पीछे की वजह जहर हो सकती है।

HighLights

  1. साधना कुटीर आश्रम के पास मिला अस्थालिन नाम की दवा के रैपर
  2. कंपाउंडर देवी सिंह से की गई पूछताछ

 जोधपुर में कथावाचक साध्वी प्रेम बाइसा की मौत की जांच के लिए पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश पासवान ने एसीपी छवि शर्मा के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया है। एसआइटी में साइबर एक्सपर्ट, महिला कांस्टेबल, दो थानेदार समेत कुल 9 लोग हैं।

साध्वी की मौत के पीछे की वजह जहर हो सकती है

सूत्रों के अनुसार, साध्वी प्रेम बाइसा की मौत के पीछे की वजह जहर हो सकती है। ऐसे में विसरा को जांच के लिए भेज गया है। पाल रोड पर स्थित साधना कुटीर आश्रम के पास से पुलिस को अस्थालिन नाम की दवा के कुछ रैपर मिले हैं। इन दवाओं के मिलने के बाद अब कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं।

 इंजेक्शन लगाए जाने के बाद साध्वी की तबीयत अचानक बिगड़ गई

एसीपी छवि शर्मा के अनुसार, साध्वी के पिता वीरम नाथ द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर तकनीकि विशेषज्ञ नए तथ्यों पर जांच कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, कंपाउंडर देवी सिंह द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के बाद साध्वी की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जो एक सामान्य प्रक्रिया नहीं थी। उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की।

पिता का कहना है कि इंजेक्शन लगाने में कहीं न कहीं लापरवाही बरती गई। छवि शर्मा ने बताया कि एसआईटी साध्वी प्रेम बाईसा के मोबाइल काल रिकार्ड, आश्रम के सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल इनपुट सहित तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।

कंपाउंडर देवी सिंह को इंजेक्शन के संबंध में हिरासत में

कंपाउंडर देवी सिंह को इंजेक्शन के संबंध में हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इंजेक्शन चिकित्सकीय सलाह पर दिया गया था और क्या इंजेक्शन की वजह से उनकी मौत हुई।

वहीं, सूत्रों के अनुसार, पोस्टमार्टम के दौरान साध्वी प्रेम बाइसा के आंतों का रंग लाल हो गया था जो जहर का संकेत है। हालांकि, पुलिस अभी भी आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

जोधपुर जेल में बंद सोनम वांगचुक की एम्स में हुई जांच

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जोधपुर की सेंट्रल जेल में चार माह से अधिक समय से बंद लद्दाख के पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह कड़ी सुरक्षा के साथ एम्स (जोधपुर) ले जाया गया। एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग में वांगचुक का परीक्षण किया गया है। इसकी रिपोर्ट सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में उनके वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा था कि जेल के पानी से उन्हें पेट की गंभीर समस्या हो रही है। कोर्ट ने उनकी जांच कर 2 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।

विगत सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले ने कहा था कि इस मामले में सामान्य जांच काफी नहीं है, उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत है।

कोर्ट ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वांगचुक की जांच किसी सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ डाक्टर से कराई जाए। ऐसे में शनिवार सवेरे सोनम वांगचुग को जोधपुर के एम्स लाया गया था। जेल प्रशासन अब उनकी मेडिकल रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगा , जिसके आधार पर कोर्ट उनके इलाज या जेल की सुविधाओं पर आगे का फैसला सुना सकता है।

राजस्थान में टाइगर रिजर्व में मोबाइल के उपयोग पर रोक

राजस्थान के रणथंभौर और सरिस्का टाइगर रिजर्व में सफारी करने वाले अब मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकेंगे। पर्यटकों को सफारी के लिए वाहन में बैठने से पहले अपने मोबाइल फोन गाइड के पास एक बैग में जमा करवाने होंगे। वनकर्मियों को भी टाइगर रिजर्व में प्रवेश से पहले अपने मोबाइल फोन बाहर जमा करवाने होंगे।

रणथंभौर टाइगर रिजर्व के जिला वन अधिकारी संजीव शर्मा ने बताया कि सफारी के दौरान पर्यटकों के द्वारा मोबाइल फोन का उपयोग करने पर रोक लगाई गई है। वन विभाग की ओर से आनलाइन बुकिंग साइट पर भी यह जानकारी अपलोड की जाएगी।

उन्होंने बताया कि मोबाइल के बढ़ते उपयोग से जंगल में वन्यजीवों की शांति को नुकसान पहुंच रहा था। सफारी के दौरान बाघ नजर आने पर अधिकांश वाहन एक ही स्थान पर एकत्रित होकर मोबाइल से फोटो लेने लगते हैं, जिससे पर्यटकों की सुरक्षा को भी नुकसान पहुंच सकता है।

80 वर्ष पहले मृत व्यक्ति के नाम से बेच दी श्वेतांबर जैन समाज ट्रस्ट की जमीन
राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के सुवाणा कस्बे में श्वेतांबर जैन समाज ट्रस्ट की वर्षों पुरानी जमीन को 80 वर्ष पहले मृत व्यक्ति के नाम से बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि मृत व्यक्ति के नाम से फर्जी आधार और पैन कार्ड बनवाकर करीब 80 लाख रुपये में जमीन का सौदा कर दिया गया।

फर्जीवाड़े में फोटो, उम्र और पता तक गलत दर्शाया गया।मामले का राजफाश तब हुआ जब ट्रस्ट की जमीन के पास रहने वाले गोपाल साधु अपनी खरीदी हुई जमीन की नपाई करवा रहे थे। राजस्व रिकॉर्ड में ट्रस्ट की जमीन आसींद निवासी मोहम्मद मुन्ना के नाम दर्ज मिली। इसकी जानकारी उन्होंने ट्रस्ट सदस्य प्रकाश को दी।

इसके बाद ट्रस्ट पदाधिकारियों ने दस्तावेज निकलवाए तो पता चला कि 17 अक्टूबर 2025 को जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। ट्रस्ट अध्यक्ष नेमकुमार ने बताया कि यह दो बीघा जमीन वर्षों से उपासरा के यति श्री केसरीचंद और शांतिनाथ जैन मंदिर के नाम दर्ज थी। यति केसरीचंद का करीब 80 वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। इसके बावजूद फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन बेची गई। रजिस्ट्री में मोहम्मद मुन्ना को खरीदार और रामकरण जाट व मोहम्मद मंसूरी को गवाह बताया गया है।

मामले से आक्रोशित जैन समाज के लोग शनिवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर व एसपी से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। समाज ने सभी आरोपितों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

केंद्रीय मंत्रियों के फर्जी वीडियो दिखा निवेश से मोटी कमाई का झांसा दे ठगी

साइबर ठगों ने एक बार फिर इंटरनेट मीडिया को हथियार बनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के फर्जी वीडियो दिखाकर बांसवाड़ा जिले के एक युवक से 10 लाख 43 हजार 905 रुपये की ठगी कर ली। फेसबुक पर निवेश से हर माह मोटी कमाई का झांसा देकर ठगों ने पीड़ित को अपने जाल में फंसा लिया।

ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाना बांसवाड़ा में शिकायत दर्ज करवाई है। साइबर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है।पीडि़त मन्साराम नायक ने बताया कि फेसबुक पर दिखे एक विज्ञापन में केंद्रीय मंत्रियों के वीडियो के जरिए निवेश योजना का प्रचार किया जा रहा था।

विज्ञापन में 22 हजार रुपये निवेश करने पर प्रतिमाह 40 से 45 हजार रुपये कमाने का दावा किया गया था। सरकारी योजना मानकर उसने अपनी जानकारी भर दी। जानकारी साझा करते ही एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को कंपनी का सीनियर मैनेजर बताते हुए विदेशी निवेश अनुभव का हवाला दिया।

14 अक्टूबर को पीड़ित ने 21 हजार 933 रुपये ऑनलाइन जमा कराए

14 अक्टूबर को पीड़ित ने 21 हजार 933 रुपये ऑनलाइन जमा कराए। इसके बाद अलग-अलग नंबरों से फोन कर क्रिप्टो करेंसी, गोल्ड और स्टाक में निवेश का लालच दिया गया। 12 नवंबर को पीड़ित ने बैंक आफ बड़ौदा, मोटागांव शाखा के खाते से सीपी दिल्ली के खाते में 9 लाख 99 हजार 989 रुपये आरटीजीएस से ट्रांसफर किए। रकम निकालने पर टैक्स और होल्डिंग चार्ज का बहाना बनाया गया।

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