F&O में सट्टेबाजी के कारण छोटे निवेशकों को हो रहा नुकसान, सरकार ने बढ़ाया STT

राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि वायदा और विकल्प (F&O) में प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) बढ़ाने का उद्देश्य सट्टेबाजी रोकना और प्रणालीगत जोखिम संभालना है। बजट में F&O पर STT में वृद्धि प्रस्तावित है। यह कदम छोटे निवेशकों को सट्टेबाजी से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए है, क्योंकि SEBI के अनुसार 90% से अधिक खुदरा निवेशक F&O में नुकसान उठाते हैं। विशेषज्ञ इसे सट्टेबाजी रोकने में सहायक मानते हैं।
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने रविवार को कहा कि वायदा और विकल्प (एफएंडओ) खंड में प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने का मकसद सट्टेबाजी की प्रवृत्तियों को रोकना और प्रणालीगत जोखिम को संभालना है।
बजट में वायदा अनुबंधों पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, विकल्प सौदों पर एसटीटी को बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव है। वर्तमान में, एसटीटी विकल्प प्रीमियम पर 0.1 प्रतिशत और विकल्प ‘एक्सरसाइज’ पर 0.125 प्रतिशत है।
सट्टेबाजी के कारण हो रहा नुकसान
बजट के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में श्रीवास्तव ने कहा कि एफएंडओ में सट्टेबाजी के कारण छोटे और खुदरा निवेशकों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य सट्टेबाजी की प्रवृत्तियों को रोकना है और इसी कारण दर में वृद्धि की गई है।
उन्होंने बताया कि यह मुख्य रूप से वायदा-विकल्प बाजारों में प्रणालीगत जोखिम को संभालने के लिए किया गया है। सेबी के अध्ययनों के अनुसार, एफएंडओ खंड में 90 प्रतिशत से अधिक खुदरा निवेशकों को नुकसान होता है। श्रीवास्तव ने कहा कि इस वृद्धि के बाद भी एसटीटी की दरें लेनदेन की मात्रा की तुलना में मामूली रहेंगी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकने में सहायक होगा, हालांकि कुछ ने चेतावनी दी है कि यह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) की भागीदारी को प्रभावित कर सकता है। (समचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)



