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वकील की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, CBI जांच की संभावना मजबूत

सुप्रीम कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के वकील विक्रम सिंह की गिरफ्तारी मामले में हरियाणा सरकार से पूछा है कि इस मामले की जांच सीबीआई को क्यों न सौंपी जाए। अदालत ने कहा कि जिस तरीके से गिरफ्तारी और पूछताछ की गई, वह कानून की नजर में गंभीर सवाल खड़े करती है।

गिरफ्तारी और यातना के आरोप

विक्रम सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि वकील को गुरुग्राम एसटीएफ ने एक हत्या के मामले में अचानक गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे पूरी रात एक खंभे से बांधकर रखा गया, बाल काट दिए गए और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी गई। यह भी आरोप लगाया गया कि उसे उसके मुवक्किलों की केस जानकारी निकालने के लिए दबाव डाला गया।

अदालत की सख्त टिप्पणी

चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर आरोप सही हैं तो यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि यह वकीलों की स्वतंत्रता और न्याय प्रणाली पर हमला है। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस यदि किसी वकील से केस की जानकारी लेने के लिए जबरदस्ती पूछताछ करती है तो यह गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन है।

क्या एक वकील को समझौता कराने के लिए मजबूर किया जा सकता है?

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि एसटीएफ के अधिकारी विक्रम सिंह पर गैंगवार विवाद में समझौता कराने का दबाव डाल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सवाल भी उठता है कि एक वकील कैसे दो अपराधी गिरोहों के बीच समझौता करा सकता है? यह उसका कर्तव्य नहीं है।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

विधि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई वकालत की स्वतंत्रता पर आघात है। एक वकील अपने मुवक्किल से मिली जानकारी को कानूनी गोपनीयता के तहत सुरक्षित रखता है। उस पर दबाव डालकर जानकारी लेना संविधान और पेशे के नैतिक नियमों का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच की मांग

अदालत ने हरियाणा सरकार से गुरुवार तक जवाब मांगा है कि क्यों न मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए इसे सीबीआई को सौंप दिया जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि स्थानीय पुलिस इस मामले में पक्षपाती तरीके से काम कर रही है।

वकीलों का अधिकार और न्याय की रक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वकीलों की स्वतंत्रता न्याय व्यवस्था की रीढ़ है। यदि कोई वकील डर और दबाव में काम करेगा, तो पूरा न्यायिक ढांचा प्रभावित होगा। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।

मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, न्याय प्रणाली का प्रश्न

यह मामला सिर्फ एक वकील की गिरफ्तारी से आगे बढ़कर न्यायिक प्रक्रिया और कानूनी स्वतंत्रता की रक्षा का मुद्दा बन गया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

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