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रामगढ़–रैणी–काकरोली में विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई: 6 पर एक्शन,करोड़ों के राजस्व पर डाका….?

अवैध सप्लाई पकड़ी गई, पर ये खेल कौन चला रहा था जनता जवाब मांग रही है।

विद्युत चोरी पर भले शिकंजा कसा, लेकिन विभाग के अंदर घुसा भ्रष्टाचार सबसे बड़ा खतरा।


क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क,मनोज कुमार सोनी। जयपुर/अलवर। जयपुर डिस्कॉम सतर्कता (Vigilance) टीम ने रामगढ़, रैणी एवं काकरोली क्षेत्र में विद्युत चोरी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया।सहायक अभियंता (विजिलेंस) अशोक कुमार मीणा के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में बिना मीटर अवैध रूप से बिजली उपयोग के कई मामले सामने आए। टीम को पूर्व में क्षेत्र से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ उपभोक्ता सीधे तार जोड़कर विद्युत आपूर्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं। शिकायतों की पुष्टि के लिए बुधवार 10 दिसंबर को विजिलेंस टीम ने स्पॉट निरीक्षण किया,जहां कई जगहों पर अवैध कनेक्शन चलते हुए मिले। जांच में सामने आए मामलों में 6 उपभोक्ताओं पर विद्युत अधिनियम के अंतर्गत लाखों रुपये की बिलिंग जारी की गई है। टीम ने घटनास्थल से अनधिकृत वायरिंग, कनेक्शन पॉइंट और अन्य तकनीकी साक्ष्य एकत्रित कर विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी है। सतर्कता दल के अधिकारियों का कहना है कि सीधे लाइन से बिजली उपयोग करना न केवल राजस्व नुकसान है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर अपराध है।

विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 135 के तहत इस तरह के मामलों में जुर्माना और कारवाई/अभियोजन का कठोर प्रावधान है।बिजली चोरी पर विभाग की ज़ीरो टॉलरेंस नीति है।जिन उपभोक्ताओं को पकड़ा गया है, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जा रही है।अभियान के बाद रामगढ़, रैणी और काकरोली क्षेत्रों में लोगों में जागरूकता और सतर्कता दोनों बढ़ी हैं। विभाग ने स्पष्ट कहा है कि राजस्व संरक्षण के लिए इस प्रकार के औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे। जयपुर डिस्कॉम सतर्कता दल ने रामगढ़, रैणी और काकरोली क्षेत्रों में बिजली चोरी के विरुद्ध सख्त कदम उठाते हुए औचक निरीक्षण किया। सहायक अभियंता (विजिलेंस) अशोक कुमार मीणा के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में सीधी लाइन से अवैध रूप से बिजली उपयोग के छह मामले पकड़े गए। इन मामलों में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत लाखों रुपये की बिलिंग प्रस्तावित की गई है।

टीम ने मौके पर अवैध वायरिंग, फॉल्स कनेक्शन पॉइंट और बिना मीटर लोड के स्पष्ट सबूत जब्त किए।बताया गया कि लंबे समय से क्षेत्र में बिना बिल कारोबार चल रहा था और विभाग को भारी राजस्व नुकसान हो रहा था। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह अवैध सप्लाई बिना विभागीय मिलीभगत के वर्षों तक कैसे चलती रही?क्या अधिकारी सो रहे थे या राजस्व चोरी पर आंखें मूंदे बैठे थे?विद्युत चोरी करने वाले तो अपराधी हैं ही,पर जो अधिकारी कानून की रक्षा के नाम पर वेतन लेते हैं और फिर सरकार को ही नुकसान पहुंचाने की अनुमति देते हैं,उनकी जवाबदेही कौन तय करेगा? विद्युत विभाग समय-समय पर “जीरो टॉलरेंस” का दावा करता है,लेकिन जब नियमों की हत्या विभाग के भीतर ही होने लगे तो फिर जनता विश्वास किससे करे?

विजिलेंस अधिकारी का कहना है ओ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।कड़े दंड और मुकदमे किए जाएंगे।”पर जनता का सवाल काय लोकम है। चोरी को बढ़ावा देने वाले कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी? कौन जांच करेगा कि अब तक कितना नुकसान छिपाया गया?कार्रवाई के बाद रामगढ़–रैणी–काकरोली में हड़कंप है।विभाग कह रहा है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा,लेकिन लोगों का कहना है आप“जांच होनी चाहिए कितने वर्षों से, किसकी छत्रछाया में यह बिजली चोरी चल रही थी?”

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