3500 करोड़ का साइबर फ्रॉड, रूस में संचालन का झूठा दावा, साइबर अपराध की जड़ें मिली राजस्थान में।
47 लाख यूजर का दावा, असल में निकले सिर्फ 4.7 लाख… खुली पोल!

पुलिस की ऐतिहासिक कार्रवाई—3500 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी का काला साम्राज्य धराशायी। क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क।
मनोज कुमार सोनी।जयपुर आज के डिजिटल युग में जहां एक क्लिक में कमाई के सपने दिखाए जाते हैं, वहीं ठगों ने लोगों की मेहनत की कमाई लूटने के नये-नये हथकंडे ईजाद कर लिए हैं। आम आदमी से लेकर उच्च शिक्षित युवा तक लालच के जाल में फँस रहे हैं, लेकिन सिस्टम की जंग ऐसी है कि अपराधी अक्सर बच निकलते हैं। हालांकि इस बार भरतपुर पुलिस ने ऐसा साइबर ठग गिरोह पकड़ा है जिसने करोड़ों नहीं… पूरे 3500 करोड़ रुपये की लूट कर डाली! भरतपुर पुलिस की विशेष टीम ने रूस के नाम पर चल रही फर्जी वैश्विक निवेश कंपनी का भंडाफोड़ किया है। कंपनी दावा करती थी कि वह क्रिप्टोमार्केट और विदेशी मुद्रा कारोबार में निवेश कर उच्च लाभ देती है। सोशल मीडिया, Telegram और WhatsApp पर बड़े-बड़े ग्रुप बनाकर देशभर के निवेशकों को शिकार बनाया गया। लाखों लोग इस झांसे में फंस गए कि बिना मेहनत और बिना जोखिम पैसा दोगुना हो जाएगा।
पुलिस जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क जयपुर में ही बैठकर चलाया जा रहा था। वेबसाइट और ऐप पर नकली प्रोफाइल बनाकर फर्जी लेन-देन का रिकॉर्ड दिखाया जाता था ताकि लोगों का विश्वास बन सके। कई निवेशकों को शुरुआत में थोड़ी-बहुत कमाई दिखाकर और बड़ा निवेश कराने के लिए उकसाया जाता था। जब राशि करोड़ों में पहुंच गई तो वेबसाइट अचानक बंद… और पैसा गायब!
सबसे हैरान करने वाली बात यह कि कंपनी ने 47 लाख यूज़र्स और 4.3 बिलियन डॉलर फंड मैनेजमेंट का दावा किया था। हकीकत में जांच टीम को सिर्फ 4.7 लाख यूजर मिले। शिकायतों का सिलसिला बढ़ा तो पुलिस ने साइबर विशेषज्ञों, फॉरेंसिक एक्सपर्ट और बैंकिंग विश्लेषकों की मदद से जाल बिछाया और आखिरकार पूरे नेटवर्क को ट्रैक कर लिया गया।
अपराधियों का शाही ठाठ-बाट:गिरोह के सदस्यों ने धोखे की कमाई से करोड़ों की प्रॉपर्टी, लग्जरी गाड़ियां, महंगी घड़ियां, एशिया और दुबई में टूर पैकेज, यहां तक कि हवाला के जरिए विदेशी बैंक खातों में भी रकम भेजी थी। पुलिस ने इनकी डिजिटल संपत्तियों, वर्चुअल करेंसी व बैंक खातों को सील कर दिया है। इस कार्रवाई से प्रदेश में साइबर अपराधियों में हड़कंप मच गया है और निवेशकों में भी जागरूकता की नई लहर दिखाई दे रही है। विशेषज्ञ कहते हैं “जहां ज्यादा मुनाफा दिखे, वहां सबसे ज्यादा धोखा छिपा होता है।” आखिर RBI-SEBI जैसी एजेंसियों को इतने बड़े फर्जी नेटवर्क की भनक देर से क्यों लगी?
बैंकों ने इतने बड़े फंड ट्रांसफर का ऑडिट समय पर क्यों नहीं किया?
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे बिना अनुमोदन वाले किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध लिंक या ऐप की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें। इस केस ने साबित कर दिया कि साइबर अपराध अब देश की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। कानून की गिरफ्त से बचने के लिए अपराधी तकनीक का सहारा लेते हैं, लेकिन भरतपुर पुलिस जैसी त्वरित और मजबूत कार्रवाई उम्मीद देती है कि अपराध चाहे कितना भी स्मार्ट क्यों न हो, कानून उससे एक कदम आगे ही होगा। यह सिर्फ एक गिरोह की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि 3 लाख परिवारों की उम्मीदों को लौटाने का प्रयास है।



