बरसाना श्रीजी महल में अफसरशाही का नंगा नाच,श्रद्धालुओं की आस्था पर बोलेरो चढ़ी।!
आस्था की नगरी में अहंकार का पहिया,नियम, कानून और भक्तिभाव सब कुचले गए।

अधिकारियों की मनमानी ने आस्था को रौंदा श्रीजी महल बरसाना में अफसरशाही की करतूत ने लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को किया आहत।
क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क।
मनोज कुमार सोनी। बरसाना | (मथुरा)। दीपावली के अगले दिन बुधवार 22 अक्टूबर की शाम करीब 6 बजे आस्था की नगरी बरसाना में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने लाखों श्रद्धालुओं के मन में सवाल और आक्रोश दोनों जगा दिए। श्रीजी महल बरसाना मंदिर, जहाँ इन दिनों दीपोत्सव के पावन अवसर पर राधा रानी के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है, वहाँ भक्तिभाव के बीच अफसरशाही का घमंड और संवेदनहीनता ने व्यवस्था को कलंकित कर दिया। जब पूरा बरसाना दीपों की जगमगाहट में राधे-राधे के जयकारों से गूंज रहा था, उसी समय भीड़ के बीच से एक सरकारी बोलेरो कार मंदिर परिसर के अंदर तक जा घुसी।
मंदिर परिसर के बाहर भारी भीड़
यह कोई आम व्यक्ति की गाड़ी नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की थी जो बिना अनुमति, बिना नियमों की परवाह किए, सीधे श्रीजी महल मंदिर के गर्भगृह मार्ग तक पहुँच गई। जहाँ लाखों भक्त नंगे पांव घंटों लाइन में लगकर राधारानी के दर्शन के लिए प्रतीक्षा करते हैं, वहीं यह वाहन श्रद्धा और अनुशासन को रौंदता हुआ आगे बढ़ गया।
गाड़ी के हॉर्न और इंजन की आवाज़ ने मंदिर परिसर की शांति तोड़ी और भक्तों में हैरानी व रोष फैल गया।दीपोत्सव के दूसरे दिन, 22 अक्टूबर शाम 6 बजे के लगभग, जब भीड़ अपने चरम पर थी, अचानक मंदिर की मुख्य गली में यह बोलेरो घुसने लगी।
भीड़ के बीच आस्था को कुचलते हुए निकली बोलेरा।
लोगों ने रोकने की कोशिश की, पर प्रशासनिक दबदबे के आगे सब बेबस दिखे। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे ठोकर खाते नजर आए।श्रद्धालुओं की भीड़ में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। जो भक्त राधारानी के दरबार में भक्ति से सिर झुका रहे थे, उनकी श्रद्धा उस वक्त अधिकारियों की मनमानी के पहियों तले कुचल गई।
मौजूद भक्तों ने सवाल उठाए — “क्या श्री राधारानी के द्वार तक पहुँचने का अधिकार सिर्फ अफसरों को है?”क्या योगी सरकार के नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं?”
यह घटना सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि आस्था का अपमान और सरकारी मर्यादा का उल्लंघन है। मंदिर प्रशासन और पुलिस कर्मियों को पहले ही निर्देश थे कि किसी भी चार पहिया वाहन को मंदिर सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

फिर भी अफसरशाही के आगे कानून और व्यवस्था दोनों झुक गए। सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक अनुशासन सब कुछ कुछ लोगों की “सुविधा” की भेंट चढ़ गया। भीड़ को संभाल रहे पुलिसकर्मी भी एक पल को हैरान रह गए कि यह वाहन मंदिर तक कैसे पहुंच गया। यह घटना प्रशासन की संवेदनहीनता और धार्मिक स्थलों के प्रति लापरवाह रवैये का आईना है। भक्तों ने इस पूरे मामले पर गुस्सा जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
श्रद्धालुओं की तीन मुख्य मांगें सामने आई हैं —
1️⃣ जिस अधिकारी ने सरकारी वाहन से मंदिर में प्रवेश किया, उसकी पहचान सार्वजनिक की जाए।
2️⃣ संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
3️⃣ भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सख्त गाइडलाइन और निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
योगी आदित्यनाथ सरकार जहां पूरे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन, सुरक्षा और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं कुछ अफसर सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं।
यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेकर जांच और कठोर कार्रवाई नहीं की, तो यह उदाहरण आने वाले समय में धार्मिक स्थलों पर अफसरशाही की निरंकुशता को और बढ़ा सकता है।
ब्रजवासी और लाखों श्रद्धालु अब मुख्यमंत्री से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वह स्वयं हस्तक्षेप कर यह साबित करें कि योगी सरकार में आस्था का अपमान करने वालों को कोई छूट नहीं। यह घटना सिर्फ मंदिर की गलियों में नहीं गूंजी, बल्कि अब यह भक्तों की आवाज बनकर प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच चुकी है। श्री राधारानी के दरबार की मर्यादा में यह मनमानी एक ऐसा धब्बा है, जिसे मिटाना अब शासन की जिम्मेदारी है।



