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अरुणाचल में 16 हजार फीट ऊंचाई पर भारतीय सेना ने मोनो रेल चलाकर रचा इतिहास

रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि इस नई प्रणाली को सोच-समझकर तैयार किया गया है। इसकी योजना बनाई गई, इंजीनियरिंग की गई और फिर इसे इलाके में सफलतापूर्वक लगाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य उन मुश्किल स्थितियों को हल करना है जिनका सामना वहाँ तैनात सैनिकों को रोज़ करना पड़ता है। पहाड़ों में बर्फ, फिसलन भरा रास्ता और कभी भी बदल जाने वाला मौसम, सैनिकों तक सामान पहुँचाने में सबसे बड़ी समस्या थी। कई बार अग्रिम चौकियाँ मौसम के कारण बाकी इलाकों से कट जाती थीं, जिससे नियमित आपूर्ति नहीं हो पाती थी। इस नई प्रणाली की वजह से अब उन चौकियों तक बिना रुकावट के सामान पहुँच सकेगा। इससे सेना को न केवल काम में आसानी होगी, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी सैनिकों को समय पर जरूरी चीजें मिल पाएंगी। अब पहले की तरह इंतज़ार या जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा। यह प्रणाली कठिन पहाड़ी इलाकों में काम करने वाले सैनिकों के लिए बहुत मददगार साबित होगी।

HighLights

  1. यह एक बार में 300 किलो से अधिक भार का परिवहन कर सकती है
  2. अग्रिम चौकियों तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में बेहद सहायक

    इस नई प्रणाली का मुख्य लक्ष्य सैनिकों की सप्लाई समस्या को हल करना है। ऊँचाई वाले क्षेत्रों में मौसम और भूभाग अक्सर रास्ते बंद कर देते हैं। प्रणाली की सफल तैनाती से अब चौकियों तक लगातार रसद पहुँच सकेगी, जो परिचालन क्षमता को बढ़ाएगी।

    पहाड़ों की बर्फ, अचानक आने वाला मौसम और टूटे-बिखरे रास्ते—इन सबके बीच सैनिकों तक सामान पहुँचाना हमेशा चुनौती रहा है। प्रवक्ता ने बताया कि अब तैयार की गई नई प्रणाली इन मुश्किलों को पार कर, आगे की चौकियों को लगातार जरूरी सामग्री पहुँचाती रहेगी।

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