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चुनाव आयोग की नई व्यवस्था और जनता की भागीदारी ने बनाया 2025 का बिहार चुनाव ऐतिहासिक

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का मतदान चरण 8 और 12 नवंबर को संपन्न हुआ।
चुनाव आयोग के आँकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल मतदान प्रतिशत 67.2% रहा, जो पिछले चुनावों की तुलना में 4.8% अधिक है।
इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही, वहीं शहरी इलाकों में युवाओं ने मतदान में अग्रणी भूमिका निभाई।

चुनाव आयोग ने इस बार कई नई व्यवस्थाएँ लागू कीं —

  • VVPAT (Voter Verified Paper Audit Trail) की 100% कवरेज,

  • दिव्यांग मतदाताओं के लिए रैम्प और विशेष बूथ,

  • महिलाओं के लिए “सखी बूथ”,

  • और तकनीक आधारित कतार प्रबंधन प्रणाली।

इन उपायों से मतदाताओं का अनुभव बेहतर और अधिक पारदर्शी रहा।
मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार, “इस बार मतदान प्रक्रिया में कोई बड़ी गड़बड़ी दर्ज नहीं हुई। मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रहा।”

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो इस बार के चुनाव में तीन मुख्य मुद्दे हावी रहे —
1️⃣ रोजगार और उद्योग
2️⃣ बेहतर सड़क व स्वास्थ्य ढाँचा
3️⃣ कानून व्यवस्था और सुरक्षा

चुनाव प्रचार के दौरान सभी दलों ने इन विषयों को अपने-अपने घोषणापत्र में शामिल किया।
हालाँकि मतदाता इस बार वादों से अधिक, पिछले कार्यकाल के प्रदर्शन को तौल रहे थे।

मतदान के बाद के रुझानों से यह साफ झलकता है कि जनता “काम करने वाली सरकार” चाहती है।
राजनीति विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार अब विकास आधारित राजनीति की ओर बढ़ रहा है, और जातीय आधार पर वोटिंग की प्रवृत्ति में कमी आई है।

ग्रामीण मतदाता रामप्रसाद यादव ने कहा, “पहले वोट जात देखकर देते थे, अब सड़क और स्कूल देखकर देंगे।”
यह कथन शायद पूरे बिहार की बदलती सोच का परिचायक है।

अंततः, यह कहा जा सकता है कि 2025 का यह चुनाव केवल प्रशासनिक दृष्टि से सफल नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परिपक्वता का प्रतीक भी है।
जनता ने न केवल मतदान का रिकॉर्ड बनाया, बल्कि बिहार की राजनीति का स्वरूप भी बदलने का संकेत दिया।

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