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जर्जर दीवारों में इलाज, लोधी हॉस्पिटल की हकीकत उजागर, सुरक्षा के नाम पर सिर्फ दिखावा।

मरीजों की जान से खेल: लोधी हॉस्पिटल में मिली एक्सपायरी दवाएं, प्रशासन सख्त।

हॉस्पिटल में एक्सपायरी दवाइयां, फर्जी संचालन, जर्जर बिल्डिंग और बिना फायर सेफ्टी उजागर; अब कानून का शिकंजा कसने की तैयारी।
क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क जयपुर। रामवीर गुर्जर। दौसा जिले के सिकंदरा गांव में स्वास्थ्य विभाग में शुक्रवार को मचा हड़कंप, जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय दौसा के निर्देश पर डिप्टी सीएमएचओ डॉ. महेंद्र गुर्जर के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोधी हॉस्पिटल में शिकायत पर जांच के लिए पहुंची। कार्रवाई इतनी सटीक और निष्पक्ष थी कि अस्पताल प्रशासन के होश उड़ गए। टीम ने अस्पताल के प्रत्येक विभाग की बारीकी से जांच की और कई गंभीर अनियमितताएं पकड़ीं।

कार्रवाई का अंदाज साफ संदेश दे गया कि अब विभाग में ईमानदारी और पारदर्शिता का दौर शुरू हो चुका है। डॉ. महेंद्र गुर्जर ने बिना किसी दबाव के हर दस्तावेज की जांच की और सभी रिकॉर्ड फोटो व वीडियो साक्ष्य के रूप में सुरक्षित किए। निरीक्षण के दौरान टीम ने अस्पताल प्रबंधन से कई सवाल किए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिले।मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सीताराम मीना के दिशा निर्देश में यह कार्रवाई जिले की अब तक की सबसे बड़ी अस्पताल जांच मानी जा रही है।

जांच में सामने आईं चौंकाने वाली खामियां।
1. बायोवेस्ट पोस्ट उपलब्ध नहीं थी।
2. फायर सेफ्टी और अलार्म सिस्टम की कोई व्यवस्था नहीं।
3. ओटी (ऑपरेशन थिएटर) में एक्सपायरी डेट की दवाइयां मिलीं।
4. हॉस्पिटल बिल्डिंग झज्जर (जर्जर) हालत में मिली।
5. अस्पताल के मानकों के अनुरूप दस्तावेज नहीं पाए गए।
6. अनटेंड स्टाफ द्वारा मरीजों का इलाज किया जा रहा था।
7. डॉक्टर की डिग्री के नाम पर फर्जी संचालन चल रहा था।
8. लैब का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला।
9. पैथोलॉजिस्ट की डिग्री नहीं थी।
10. स्टाफ की सैलरी स्लिप, ड्यूटी रजिस्टर और हाजिरी रजिस्टर नहीं मिले।
11. दवाओं के भंडारण का कोई प्रोटोकॉल नहीं था।
12. क्लिनिकल वेस्ट डिस्पोज़ल सिस्टम भी अनुपस्थित था।
14. एंबुलेंस सुविधा मौजूद नहीं थी, जबकि नियमों के अनुसार अनिवार्य है।

सीएमएचओ डॉ. सीताराम मीना की ईमानदार कार्यशैली और डॉ. महेंद्र गुर्जर की निष्पक्ष नेतृत्व क्षमता ने इस कार्रवाई को एक नई दिशा दी है। पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी निजी अस्पताल के खिलाफ राजनीतिक या बाहरी दबाव के बिना कार्रवाई की गई। हमारा लक्ष्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और कानून का पालन सुनिश्चित करना है।जहां लापरवाही है, वहां कार्रवाई निश्चित है। स्वास्थ्य विभाग की छवि साफ-सुथरी होनी चाहिए। कोई भी अस्पताल मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं कर सकता।

कार्रवाई के बाद ग्रामीणों और मरीजों में नई उम्मीद जगी है।लोगों का कहना है कि वर्षों से शिकायतें की जा रही थीं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती थी। अब विभाग की सख्त कार्रवाई से भरोसा लौटा है ग्रामीणों ने कहा मुख्य चिकित्सा अधिकारी और डिप्टी सीएमएचओ दोनों ने साबित कर दिया कि अगर अधिकारी ईमानदार हों, तो सिस्टम खुद सुधर सकता है। अब हमें भरोसा है कि दोषियों को सजा और मरीजों को न्याय मिलेगा।

स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज – दौसा के सिकंदरा लोधी हॉस्पिटल में इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों में हड़कंप मचा हुआ है। कई हॉस्पिटल मालिक अपने दस्तावेज और रजिस्ट्रेशन अपडेट कराने में जुट गए हैं। सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग अब जिले के अन्य निजी अस्पतालों पर भी इसी तरह की

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, लोधी हॉस्पिटल की रिपोर्ट अब जिला प्रशासन और ड्रग इंस्पेक्टर ऑफिस को भेजी जाएगी। यदि फर्जी संचालन प्रमाणित हुआ, तो एफआईआर दर्ज कर सीलिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

जिले के स्वास्थ्य ढांचे के लिए सबक- इस पूरे मामले ने दौसा जिले के स्वास्थ्य ढांचे पर गहरा सवाल खड़ा किया है। कई निजी संस्थान बिना मानक और रजिस्ट्रेशन के वर्षों से चल रहे हैं। लेकिन अब विभाग की सख्ती ने यह संकेत दे दिया है कि

अब कोई भी अस्पताल कानून से ऊपर नहीं – लोधी हॉस्पिटल की कार्रवाई ने न केवल एक फर्जी अस्पताल का चेहरा उजागर किया, बल्कि दौसा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की नई शुरुआत भी की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सीताराम मीना की ईमानदार कार्यशैली और डिप्टी सीएमएचओ डॉ. महेंद्र गुर्जर की निष्पक्ष जांच ने यह दिखा दिया है कि अगर नीयत साफ हो तो सिस्टम भी पारदर्शी बन सकता है। अब मरीजों को लगने लगा है कि विभाग में बदलाव आ रहा है, और इस बार सिर्फ जांच नहीं न्याय की आस जगी है।

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