खुटला गांव के बच्चों ने रचा उदाहरण, मंदिरों की सफाई और देखरेख में दिखाया समर्पण।
आधुनिक दौर में भी जिंदा है आस्था: ख़ुटला के युवा बने भक्ति की मिसाल।

पढ़ाई के साथ सेवा की मिसाल: ख़ुटला गांव के युवाओं ने मंदिरों को बनाया अपनी आस्था की पाठशाला

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क जयपुर
गिरधरपूरा (दौसा)। जहां आज की युवा पीढ़ी आधुनिक जीवनशैली में व्यस्त है, वहीं दौसा जिले के गिरधर पूरा के समीप स्थित ख़ुटला गांव के बच्चे और युवा एक अलग ही राह पर चल रहे हैं। ये बच्चे दिन में पढ़ाई करते हैं और शाम होते ही मंदिरों में पहुंचकर हर सेवा कार्य में भागीदारी निभाते हैं।
गांव के युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि शिक्षा और आस्था दोनों साथ-साथ चल सकती हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद ये बच्चे मंदिरों की सफाई, पूजा की तैयारी, दीप सजावट और भगवान के आसन तक की देखरेख करते हैं। किसी के हाथ में झाड़ू होती है तो कोई फूल सजाता है, और कोई दीया जलाकर मंदिर परिसर को रोशनी से भर देता है।
यह नज़ारा ख़ुटला गांव के प्रसिद्ध हनुमान जी मंदिर में देखने को मिला गांव के लोग कहते हैं कि इन बच्चों की सेवा भावना ने पूरे माहौल को बदल दिया है। पहले मंदिरों में सन्नाटा रहता था, अब आरती और भजन की गूंज हर गली तक पहुंचती है।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि “ये बच्चे दिनभर स्कूल जाते हैं और समय मिलने पर भगवान की सेवा में लग जाते हैं। इससे गांव में एक नई चेतना आई है, लोग अब मंदिरों की ओर फिर से आकर्षित हो रहे हैं।”
गांव की महिलाएं और बुजुर्ग भी बच्चों की इस पहल से खुश हैं। वे कहते हैं कि यह नई पीढ़ी न सिर्फ पढ़ी-लिखी है, बल्कि संस्कारों में भी अग्रणी है। बच्चों ने खुद ही मंदिर की सफाई के लिए पहल की और अब पूरा समूह मिलकर मंदिर प्रांगण की साफ-सफाई करता है।
इन युवाओं ने अपने लिए एक नारा भी तय किया है शिक्षा से ज्ञान, और सेवा से सम्मान। इस नारे ने गांव के बाकी युवाओं को भी प्रेरित किया है।
ख़ुटला गांव के शिव मंदिर और हनुमान मंदिर अब सिर्फ पूजा स्थल नहीं रहे, बल्कि संस्कार की पाठशाला बन गए हैं, जहां हर बच्चा यह सीख रहा है कि धर्म केवल पूजा तक सीमित नहीं यह समाज और संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने का जरिया भी है।
गांव के सरपंच प्रतिनिधि का कहना है कि बच्चों की इस सेवा भावना ने पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधा है। ये युवा अब त्योहारों और विशेष अवसरों पर भी मंदिर सजावट स्वयं करते हैं।
गांव में लोग कहते हैं कि जब नई पीढ़ी किताबों और कर्म दोनों में समान रूप से आगे बढ़ रही हो, तो उस गांव का भविष्य उज्ज्वल होना तय है। ख़ुटला के ये बच्चे आज पूरे क्षेत्र के लिए उदाहरण बन चुके हैं दिन में पढ़ाई, शाम को सेवा, और हर समय आस्था का उजाला।



