सरकारी स्वास्थ्य योजना में घोटाला! ₹40 करोड़ की वसूली, 17 FIR दर्ज।
RGHS में बड़ा फर्जीवाड़ा: 34 अस्पताल, 431 फार्मा स्टोर निलंबित

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क।
मनोज कुमार सोनी! जयपुर राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में चल रहे घोटाले पर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। योजना के नाम पर फर्जी इलाज, क्लेम धोखाधड़ी और दवा घोटाले से सरकारी खजाने को भारी चूना लगाया जा रहा था। तीन महीने में की गई कार्रवाई में स्वास्थ्य विभाग ने 34 प्राइवेट अस्पताल और 431 फार्मा स्टोर को योजना से निलंबित कर दिया है। दुरुपयोग में शामिल 28 कर्मचारियों को सेवा से हटाया गया है और 17 FIR दर्ज की गई हैं। कुल मिलाकर करीब ₹40 करोड़ की पैनल्टी वसूली जा चुकी है।
जांच में खुलासा हुआ कि कई अस्पतालों ने एक ही सर्जरी का दो बार भुगतान उठाया। कुछ अस्पतालों ने मरीजों को भर्ती दिखाकर बिल क्लेम किया जबकि मरीज असल में OPD में ही थे। सस्ती जांच को महंगे पैकेज में क्लेम किया गया। कई अस्पतालों में अनावश्यक टेस्ट करवाकर पैसा लूटा गया।
फार्मा स्टोर्स में भी बड़े पैमाने पर धांधली पकड़ी गई। दवा दिए बिना बिल जारी करना, अस्तित्वहीन दवाओं के नाम पर क्लेम उठाना, और डॉक्टरों के साथ मिलकर फर्जी बिलिंग करना आम बात बन चुकी थी। इस मामले में कई लाभार्थियों की भी भूमिका सामने आई। उन सभी के 1,000 से ज्यादा RGHS कार्ड ब्लॉक कर दिए गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा— “सरकार किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी। सरकारी योजना के नाम पर भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।” प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य योजना को पारदर्शी बनाना और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह नकेल कसना है। उन्होंने कहा कि आगे से फर्जीवाड़े पर तुरंत कार्रवाई होगी।
स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ हरजी लाल अटल के अनुसार— योजना को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनाया जा रहा है। एआई बेस्ड मॉनिटरिंग शुरू की जाएगी, जिससे फर्जी बिलिंग तुरंत पकड़ में आ सकेगी। योजना से जुड़े डॉक्टरों, अस्पताल संचालकों और फार्मासिस्टों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि धोखाधड़ी पाए जाने पर लाइसेंस तक निरस्त किया जा सकता है।
सरकार का दावा है कि इस सख्ती से भविष्य में कोई भी संस्था गलत तरीके से क्लेम उठाने की हिम्मत नहीं कर पाएगी। वहीं कर्मचारियों और पेंशनर्स को अब अधिक भरोसे के साथ इलाज की सुविधा मिल सकेगी। कुल मिलाकर कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य योजनाओं के नाम पर भ्रष्टाचार करने वाले अब बेनकाब होकर कठोर दंड से गुजरेंगे।



