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कोटा में भैंस के मालिकाना हक पर बवाल; पुलिस ने ऐसे की असली मालिक की पहचान

कोटा में एक भैंस के मालिकाना हक को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। मामला कुन्हाड़ी थाने पहुंचा, जहां पुलिस को असली मालिक की पहचान करनी थी। पुलिस ने दोनों पक्ष से भैंस की उम्र पूछी। जिसके बाद भैंस की मेडिकल जांच करवाकर उसे असली मालिक को सौंप दी।

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राजस्थान के कोटा से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जहां एक भैंस ने पुलिस के पसीनें छुड़ा दिए। क्योंकि, यह मामला भैंस के चोरी या डकैती का नहीं, बल्कि उसेक असली मालिक के पहचान करने का था। क

दरअसल, यह पूरा मामला शनिवार का है। जब कोटा के कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र का है, जहां भैंस और उसके बच्चे पर मालिकाना हक को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गए। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष इसको लेकर थाने पहुंच गए। दोनों ही पक्ष भैंस को अपना बता रहे थे और किसी कीमत पर कोई पीछे नहीं हट रहा था।

कौन बोल रहा सच?

पुलिस को भी यह फैसला ले पाना मुश्किल हो रहा था कि आखिर सच कौन बोल रहा है। असमंजस में फंसता मामला देख थाना अधिकारी कौशल्या गालव ने भैंस और उसके बच्चे को गाड़ी में लोड करवाकर थाने मंगवा लिया।

मेडिकल रिपोर्ट में हुआ खुलासा

इसके बाद विवाद सुलझाने के लिए पुलिस ने दोनों से भैंस की उम्र पूछी। पहला पक्ष बालिता रोड निवासी इंद्रजीत केवट ने दावा किया कि भैंस उसकी है और उसकी उम्र 7 साल है। जबकि, दूसरा पक्ष रामलाल मेघवाल ने भैंस को अपना बताते हुए उसकी उम्र साढ़े 4 साल बताई।

इसके बाद सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस ने पशु चिकित्सकों की टीम को बुलाया। डॉक्टरों ने भैंस का मेडिकल चेकअप किया। मेडिकल रिपोर्ट में भैंस की उम्र 4 से 5 साल के बीच पाई गई। इस रिपोर्ट ने रामलाल मेघवाल के दावे की पुष्टि कर दी और पुलिस ने ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर भैंस और उसके बच्चे को रामलाल मेघवाल को सौंप दिया।

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