‘आइ लव मोहम्मद’ विवाद पर आजम खान ने किसे जिम्मेदार ठहराया?
लोगों के बीच भेदभाव और नफरत फैलाने का कार्य किया जा रहा है।

नई दिल्ली। हाल ही में ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। इस विवाद पर आजम खान ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। उनका कहना है कि यह मुद्दा समाज में सौहार्द बिगाड़ने की साजिश है। आजम ने स्पष्ट किया कि यह विवाद धर्मनिरपेक्षता को कमजोर करने का प्रयास है और इसे किसी विशेष राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
आजम खान ने इस विवाद पर अपनी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस प्रकार के मुद्दे लोगों को आपस में बांटने का काम करते हैं। उन्हें लगता है कि यह सब एक सोची-समझी योजना का हिस्सा है, जिसमें लोगों के बीच भेदभाव और नफरत फैलाने का कार्य किया जा रहा है।
दीवाली के मौके पर, आजम खान ने दीवाली के महत्व पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जो लोग दीये रोशन करते हैं, उनका उद्देश्य एक सकारात्मक संदेश फैलाना होता है। उनका मानना है कि प्रकाश का यह त्योहार सभी के लिए एकता और भाईचारे का प्रतीक है। दीवाली केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह सभी धर्मों और समुदायों के बीच प्यार और समर्पण का प्रतीक है।
अयोध्या दीपोत्सव के दौरान आजम खान ने भी सियासत गरमाने वाली टिप्पणियाँ की। उन्होंने कहा कि जो लोग दीये जला सकते हैं, वे किसी भी चीज को जला सकते हैं। इस बयान का अर्थ है कि लोगों का विचार और भावनाएं कितनी मजबूत हो सकती हैं, और ये बातें राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती हैं।
आजम खान ने अयोध्या में दीवाली समारोह के दौरान राजनैतिक बयानबाजी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब राजनीतिक असहिष्णुता इतनी बढ़ गई है कि त्योहार भी इससे अछूते नहीं रह गए हैं।
समाज में सद्भावना को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। आजम खान का मानना है कि हमें एकजुट होकर सभी प्रकार के भेदभाव का सामना करना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नफरत और भेदभाव की बुनियाद पर बिनाज करें और एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ें।
आजम खान का यह विवाद न केवल उनके व्यक्तिगत विचारों को उजागर करता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि आज का समाज किस दिशा में अग्रसर है। हमें चाहिए कि हम ऐसे मुद्दों पर ध्यान दें और एकजुटता के साथ आगे बढ़ें। त्योहारों का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं होता, बल्कि यह समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश फैलाना भी है।
आधुनिक राजनीति में जहां मुद्दों का राजनीतिकरण किया जा रहा है, वहां आजम खान जैसी आवाजें हमें पहले सोचना और समझना सिखाती हैं। समाज में सौहार्द और समझदारी के बिना हम किसी भी मुँहबोले प्रतीक को सच्चे अर्थों में मान्यता नहीं दे सकते।
इसलिए, हमें अपने विचारों का विस्तार करना होगा और नफरत के स्थान पर प्रेम और सहिष्णुता को बढ़ावा देना होगा।



