दिल्ली एनसीआरसफ़ेद कोर्ट के काले कारनामे

दिल्ली धमाके के बाद चिकित्सा क्षेत्र में हलचल: 200 से अधिक डॉक्टरों को एजेंसियों ने रडार पर लिया।

कैरियर में डॉक्टर, रात में आरोपीः दिल्ली धमाके से जुड़ी दहशत पर चिकित्सकीय संस्थाओं पर सवाल।

 दिल्ली ब्लास्ट के बाद 200 डॉक्टरों की लिस्ट तैयार, एक-एक कर सबसे होगी पूछताछ।

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क। मनोज कुमार सोनी।

नई दिल्ली: दिल्ली बम ब्लास्ट की जांच आगे बढ़ रही है. सुरक्षा एजेंसियों ने लिस्ट तैयार की है और एक एक कर सबसे पूछताछ की जा रही है. मामले के तार कश्मीर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के साथ साथ विदेशों से भी जुड़े हैं.सूत्रों के अनुसार, इन डॉक्टरों और छात्रों के डॉ. शाहीन, डॉ. उमर मोहम्मद से और अन्य आरोपियों से संपर्क रहे हैं और यह जांच की जा रही है कि जा रही है कि कहीं यह व्हाइट कॉलर मॉड्यूल का हिस्सा तो नहीं. उत्तर प्रदेश के करीब 200 डॉक्टर एजेंसियों के रडार पर हैं. गिरफ्तार होने वाली महिला डॉक्टर शाहीन ने पाकिस्तान समेत कई देशों में नेटवर्क बनाया था.

उसके संपर्क में पाकिस्तान सेना के डॉक्टर समेत कश्मीरी मूल के कई और डॉक्टर और छात्र थे. यूपी में काम करने वाले कश्मीरी मूल के करीब 200 डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंट एजेंसियों के रडार पर हैं.

यूपी की डॉक्टरों के संपर्क में थी शाहीन: सूत्रों से खुलासा हुआ है कि डॉक्टर शाहीन लगातार यूपी में काम करने वाले 30 से 40 डॉक्टर के संपर्क में थी. शाहीन वह महिला है जिसे जैश ए मोहम्मद का हिंदुस्तान में महिला विंग का रिक्रूटर माना जा रहा है. पूछताछ के लिए एटीएस की एक टीम दिल्ली है दूसरी श्रीनगर जाने की तैयारी में है, यानी अभी और लोगों को हिरासत में लिया जा सकता है.

शाहीन के संपर्क में आने वाले डॉक्टरों को मेवात से उठाया: जांच एजेंसियों ने मेवात से बीती रात तीन डॉक्टरों से हिरासत में लिया है. इनसे पूछताछ की जा रही है . इन तीनों डॉक्टरों का संबंध अल फलाह यूनिवर्सिटी से है. इनमें से एक डॉक्टर मुस्तकीम ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से इंटर्नशिप किया है, इसकी भूमिका की जांच की जा रही है. खबरों के मुताबिक मुजम्मिल, उमर और शाहीन के संपर्क में था उससे पूछताछ की जा रही है.

दिल्ली में घटी भयंकर कार बम विस्फोट मामले की जांच तेज़ गति से आगे बढ़ रही है। इस प्रकरण में सुरक्षा-एजेंसियों ने लगभग 200 डॉक्टरों की लिस्ट तैयार की है और एक-एक कर उनसे पूछताछ शुरू है। मामले के तार केवल एनसीआर तक ही नहीं सिमटते, बल्कि यह उत्तर प्रदेश, हरियाणा, कश्मीर तथा विदेशों तक फैले ‘व्हाइट-कलर’ आतंक मॉड्यूल से भी जुड़े होने के संदेह में हैं।

जांच का स्वरूप और प्रमुख बिंदु सूत्रों के अनुसार, इन डॉक्टरों और मेडिकल-स्टूडेंट्स का नेटवर्क Jaish‑e‑Mohammed एवं Ansar Ghazwat‑ul‑Hind जैसे आतंकवादी संगठनों से जुड़ा होने की जांच की जा रही है।

जांच में यह बात सामने आई है कि डॉक्टरों एवं छात्रों ने पाकिस्तान और अन्य देशों के हैंडलर्स से संपर्क किया था, और विद्युतीय संवाद ऐप्स के माध्यम से संचालित नेटवर्क बना था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, National Investigation Agency (NIA) सहित कई एजेंसियाँ इस मामले में सक्रिय हैं।  जांच में एक विशेष चिकित्सकीय समूह (डॉक्टर-मॉड्यूल) सामने आया है, जिसमें कुछ डॉक्टरों को पहले ही हिरासत में लिया गया है और इनके संबंध एक निजी विश्वविद्यालय से भी पूछताछ के दायरे में हैं।

जांच के दौरान उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा में मेडिकल-स्टूडेंट्स तथा डॉक्टरों से संपर्क और पूछताछ हुई है। हेल्‍थ सेक्टर में काम करने वाले चिकित्सकों के इस प्रकार के नेटवर्क की संभावना ने पूरे देश में चिकित्सा क्षेत्र में सुरक्षा-जांच की नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं।

तकनीकी विवरण एवं प्रमाण-साधन जांच में मोबाइल कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) और इलेक्ट्रॉनिक संवाद ऐप्स की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि नेटवर्क की गहराई और उसके संचालकों का पता लग सके। इसके अतिरिक्त विस्फोट के समय इस्तेमाल की गई तकनीक, विस्फोटक सामग्री, एवं आतंकी-सक्रियता के संकेत भी एजेंसियों द्वारा विश्लेषित किए जा रहे हैं।

इस पूरे प्रकरण को अब ‘श्वेत-पोश’ (white-collar) आतंक मॉड्यूल कहा जा रहा है, क्योंकि इस में न केवल विशुद्ध आतंकवादी बल्कि शिक्षित डॉक्टर-प्रोफेशनल शामिल हैं।

सरकारी प्रतिक्रिया एवं आगे की रणनीति सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तमाम संबंधित एजेंसियों को सक्रिय कर दिया है–राष्ट्रीय स्तर पर तल्लाशी अभियान चलने लगे हैं।

चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टरों, मेडिकल-कॉलेजों तथा छात्रों की पृष्ठभूमि-प्रवेश-संपर्कों की जांच अब एक नियमित प्रक्रिया बन गई है। अगले कुछ दिनों में और भी लोगों को हिरासत में लेने तथा विस्तार में पूछताछ करने की संभावना जताई जा रही है।

मुकाबला-चुनौतियाँ एवं सामाजिक प्रभाव

यदि यह चिकित्सकीय पेशे से जुड़े लोगों द्वारा संचालित नेटवर्क का मामला है, तो यह चिकित्सा-विश्वास, डॉक्टर-मरीज संबंध, और चिकित्सा शिक्षा पर भरोसा प्रभावित कर सकता है।

मीडिया तथा आम नागरिकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि कैसे इतनी सुविधा-संपन्न स्थिति में काम कर रहे डॉक्टर इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं इसे एक चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है।

Related Articles

Back to top button