कानून में बदलाव
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गांव-गांव न्याय की राह: पंचायत राज अधिकारियों को मिलेगा कानूनी प्रशिक्षण।

गृह राज्य मंत्री बेढम बोले — पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई हो प्राथमिकता

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क।

मनोज कुमार सोनी। जयपुर सम्मेलन में भाग लेने वाले विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि नए आपराधिक कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को तेज़ और अधिक पारदर्शी बनाना है। इसमें ग्राम स्तर तक प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। सत्र के दौरान वक्ताओं ने कहा कि नए कानूनों से आमजन को अधिक सुरक्षा प्रदान करने के प्रावधान हैं, लेकिन इन प्रावधानों की सही जानकारी गांवों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है। ग्राम पंचायतों को यह समझना होगा कि किन परिस्थितियों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद लेते हुए पीड़ितों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराया जा सकता है।

प्रशिक्षण से बढ़ेगी कार्यक्षमता कार्यक्रम में बताया गया कि पंचायत राज अधिकारियों के लिए ऐसे प्रशिक्षण न केवल उनकी कानूनी समझ को बढ़ाएंगे, बल्कि प्रशासनिक निर्णयों में मजबूती और निष्पक्षता भी सुनिश्चित करेंगे। सीडीटीआई की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के रूप में तैयार की जा रही है, जिसे आगे देश के अन्य राज्यों में भी लागू करने की योजना है। सम्मेलन के दौरान महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामलों में अक्सर पीड़ित न्याय के लिए आगे नहीं आ पाते। पंचायत प्रतिनिधियों का संवेदनशील व्यवहार और सही कानूनी मार्गदर्शन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

साइबर अपराध पर जागरूकता प्रमुख चुनौती तेजी से बढ़ते डिजिटल उपयोग के साथ साइबर अपराध ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच चुका है। अधिकारियों ने माना कि नए आपराधिक कानूनों में साइबर अपराधों के लिए कठोर दंड और स्पष्ट प्रावधान शामिल हैं। पंचायत स्तर पर तकनीकी जागरूकता की अलख जगाना आज की आवश्यकता है। गरीब, किसान और वंचित वर्गों से जुड़े कई कानूनी मामलों में देरी और प्रक्रियात्मक उलझनें समस्या बनी रहती हैं। पंचायत अधिकारियों को इन मामलों में पीड़ित परिवारों की सहायता करते हुए पुलिस विभाग के समन्वय से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

समन्वय ही सफलता की कुंजी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रशासनिक विभागों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर संवाद और सूचना आदान-प्रदान सुनिश्चित हो जाए, तो अधिकांश कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सकता है। सम्मेलन में वक्ताओं ने स्थानीय शासन में पारदर्शिता और ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और धन के दुरुपयोग के खिलाफ पंचायत राज संस्थाएँ निर्णायक कदम उठाएँ  तभी जनविश्वास बढ़ेगा।

नए कानून नया न्याय दर्शन विशेषज्ञों के अनुसार, नए आपराधिक कानूनों में पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिससे न्याय प्रक्रिया में पीड़ित व्यक्ति की सुरक्षा, सहायता और सम्मान सर्वोपरि बनेगा। इस बदलाव को लागू करने में पंचायतें स्थानीय स्तंभ बनेंगी। सम्मेलन में यह संदेश दिया गया कि जब पंचायत स्तर पर कानून व्यवस्था और सुरक्षा मजबूत होगी, तभी ग्रामीण विकास और सामाजिक उत्थान के लक्ष्य पूरी तरह साकार हो पाएँगे।

दूसरे दिन कई तकनीकी सत्र कार्यक्रम के दूसरे दिन में शिकायत निवारण तंत्र, पंचायत स्तर पर अभिलेख प्रबंधन, सुनवाई प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग और कानूनी रिपोर्टिंग जैसे कई व्यावहारिक मुद्दों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। सम्मेलन में राज्य के विभिन्न जिलों से आए पंचायत राज अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक विशेषज्ञों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने कहा कि यह कार्यक्रम उनकी क्षमता को एक नई दिशा देगा और ग्रामीण न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावशाली बनाएगा।

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