Mewat News: मांडीखेड़ा में बूचड़खानों का जहर, 20 गांवों में सांस लेना मुश्किल; बदबू 12 KM तक

मांडीखेड़ा में चल रहे बूचड़खानों से निकलने वाले बदबूदार धुएं के कारण लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई महीनों से इनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इस धुएं से आसपास के 20 गांव प्रभावित हैं, और लोगों को गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

जिले के मांडीखेड़ा में चल रहे बूचड़खाने लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। इनसे निकलने वाले बदबूदार धुएं से खुले में सांस लेना मुश्किल हो गया है, जिससे इलाके के लोग परेशान हैं। लोगों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी दो बूचड़खानों से हो रही है। वे कई महीनों से इनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद ये नियमों का पालन किए बिना चल रहे हैं।
इससे एक-दो नहीं, बल्कि एक दर्जन से ज्यादा गांव परेशान हैं। आरोप है कि दिन में बूचड़खाने बंद रहते हैं, लेकिन शाम होते ही इनकी चिमनियां चालू हो जाती हैं। इनसे निकलने वाला बदबूदार धुआं हवा में जहर घोल रहा है। फिर भी प्रशासन इनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। शाम ढलने के बाद खाना खाना भी मुश्किल हो जाता है।
बता दें कि जिले में बूचड़खानों को बंद कराने के लिए कई बार पंचायतें हो चुकी हैं, लेकिन इनका जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिख रहा है। कुछ दिनों तक तो लोगों ने हर जगह इसकी शिकायत की, लेकिन उसके बाद मामला ठंडा पड़ने लगा।
इलाके के रहने वाले इकबाल, रुस्तम, खालिद, अब्बास, आफताब, इब्राहिम और अमजद का कहना है कि आस-पास के करीब 20 गांव बदबूदार धुएं से परेशान हैं। यह बदबू 10 से 12 किलोमीटर तक फैली हुई है। इस गंदगी में पनपने वाले मक्खी-मच्छर बीमारियां फैला रहे हैं, जिससे लोगों को स्किन की बीमारियां, टीबी, अस्थमा और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां होने का खतरा है।
बूचड़खाने के खून और गंदे पानी से फैल रही बीमारियां
हेल्थ डिपार्टमेंट के मुताबिक, दाद, खाज, खुजली, उल्टी, दस्त और पेट दर्द के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अकेले जिला अस्पताल, मांडीखेड़ा में हर दिन 300 मरीज इन्हीं बीमारियों के आ रहे हैं, जबकि पहले यह एवरेज सिर्फ 20 या 30 था। लोगों के मुताबिक, ये बीमारियां सिर्फ बूचड़खाने की वजह से हो रही हैं। क्योंकि ये बीमारियां यहां से निकलने वाले खून और गंदगी से पैदा हो रही हैं। खून और मल को स्लॉटर हाउस के पास खेतों में फेंका जाता है, जहां प्रशासन को दिखाने के लिए पेड़ लगाए गए हैं।
बूचड़खानों के बारे में जल्द ही जांच की जाएगी। अगर वे नियमों के खिलाफ चल रहे हैं, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। पहले भी लोगों की शिकायतें आई हैं, और उन पर कार्रवाई की गई है।
– लक्ष्मी नारायण, SDM फिरोजपुर झिरका



