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भारत ने बढ़ाई आर्थिक ताकत, विदेशी बैंकों से सोना वापस।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत का बड़ा फैसला, सोना सुरक्षित देश में।

 विदेशों से लौट रहा भारत का सोना, केंद्र की मास्टर स्ट्रेटेजी

नई दिल्ली: बदलते वैश्विक हालात और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने अपनी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। देश ने विदेशों में जमा अपने स्वर्ण भंडार को तेजी से वापस मंगवाना शुरू कर दिया है, जिसे आर्थिक मजबूती की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, भारत ने बैंक ऑफ इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड के बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स से कुल 168 टन सोना दो चरणों में वापस मंगवाया है। इसमें करीब 104.23 टन और 63.83 टन सोना शामिल है।
यह कदम सिर्फ सामान्य प्रक्रिया नहीं बल्कि एक बड़ी रणनीतिक योजना का हिस्सा है। पिछले तीन सालों में भारत अब तक 378 टन से ज्यादा सोना विदेशों से अपने देश में वापस ला चुका है। इससे साफ है कि केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी निर्भरता कम कर देश में भंडारण बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं।
RBI के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल लगभग 880 टन स्वर्ण भंडार में अब करीब 77% सोना देश के भीतर ही सुरक्षित रखा जा रहा है, जबकि 2023 में यह आंकड़ा महज 38% था। यह बदलाव भारत की आर्थिक नीति में बड़ा परिवर्तन दर्शाता है।
दरअसल, साल 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ी, जिसके चलते भारत ने अपनी स्वर्ण भंडारण नीति में बड़ा बदलाव किया। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया कि देश का अधिकतम सोना भारत में ही सुरक्षित रहे, ताकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में जोखिम कम किया जा सके।
हालांकि, अब भी भारत का करीब 197.7 टन सोना इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड के बैंकों में जमा है, जिसे भविष्य में धीरे-धीरे वापस लाने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को आर्थिक रूप से और ज्यादा मजबूत बनाएगा और वैश्विक स्तर पर उसकी स्थिति को भी सशक्त करेगा।

सुरक्षा का बड़ा संकेत माना जा रहा है।भारत अब धीरे-धीरे विदेशी सिस्टम पर निर्भरता कम कर रहा है। सोने की वापसी से देश की आर्थिक संप्रभुता और मजबूती और बढ़ेगी। वैश्विक संकट के दौर में यह कदम भारत को सुरक्षित स्थिति में रखेगा।

 RBI की यह नीति भविष्य के लिए सुरक्षित निवेश रणनीति मानी जा रही है। विशेषज्ञ इसे भारत की लंबी आर्थिक तैयारी और दूरदर्शिता बता रहे हैं।आने वाले समय में और सोना भारत लाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

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