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देवरिया भूमि विवाद में पूर्व IPS अरेस्ट, आधी रात AC कोच से उतारे गए अमिताभ ठाकुर…..?

अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर हलचल, समर्थकों ने कहा ‘सच को चुप कराने की कोशिश’



क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क, मनोज कुमार सोनी। शाहजहांपुर। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी को लेकर देर रात रेलवे स्टेशन पर जिस तरह से कार्रवाई की गई, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रेन जैसे ही जंक्शन पर रुकती है, पुलिस टीम फौरन कोच में चढ़ती है और बिना किसी हड़बड़ी के उन्हें उतारकर सरकारी वाहन में बैठा देती है। यह पूरा घटनाक्रम कुछ ही मिनटों में हो गया। यात्रियों को भी पता नहीं चला कि अचानक क्या हुआ। देवरिया में दर्ज मामले में आरोप है कि एक पुरानी आवासीय भूमि के आवंटन में अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी का नाम शामिल किया गया था। हालांकि, नूतन ठाकुर का दावा है कि: संबंधित प्लॉट से उनका कोई लेन–देन 25 वर्षों से नहीं मामले को राजनीतिक कारणों से खींचकर जोड़ा जा रहा है पुलिस पहले भी उनसे इस केस में संपर्क कर सकती थी, लेकिन ट्रेन रोककर गिरफ्तारी सिर्फ माहौल बनाने के लिए की गई।



उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस को पूछताछ ही करनी थी, तो नोटिस जारी कर बुलाया जा सकता था। अमिताभ ठाकुर और विवादों का पुराना रिश्ता अमिताभ ठाकुर शुरुआत से ही सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार और राजनीतिक दखल के खिलाफ मुखर रहे हैं।कई बार उन्होंने वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों पर प्रश्न उठाए यूपी में कई हाई-प्रोफाइल मामलों में शिकायतकर्ता भी रहे इसी कारण 2015 में सरकार से सीधी टकराहट हुई फिर जबरन रिटायरमेंट का मामला भी काफी सुर्खियों में रहा विश्लेषकों का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी लंबे समय से चली आ रही टकराहट का परिणाम भी हो सकती है।देर रात सूचना न मिलना बना चिंता का कारण नूतन ठाकुर ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद कई घंटे तक उन्हें कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि:गिरफ्तारी के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग से बचने की कोशिश की गई अमिताभ ठाकुर के फोन को भी तत्काल स्विच ऑफ करा दिया गया उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा “जो सच बोलता है, उसे इसी तरह चुप कराया जाता है।”कानूनी लड़ाई तेज होने के संकेत नूतन ठाकुर ने साफ किया कि वे इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देंगी। उनका कहना है कि मामला पूरी तरह झूठे आरोपों पर आधारित है और वे जल्द ही गिरफ्तारी की विधिक वैधता केस की पुरानी पृष्ठभूमि और पुलिस की अचानक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपील करेंगी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गिरफ्तारी के दौरान क्राइम ब्रांच के 8–10 जवान मौजूद थे और प्रदेश स्तर के कुछ अधिकारी भी निगरानी में थे। इससे भी यह संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ पूछताछ का नहीं, बल्कि बड़ी कार्रवाई की तैयारी भी हो सकती है। यह विवाद आगे और भी बड़ा हो सकता है क्योंकि अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी पहले भी सिस्टम के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ते रहे हैं। अब देखना होगा कि देवरिया पुलिस पूछताछ में क्या नया सामने आता है और क्या यह मामला सिर्फ भूमि विवाद है या इसके पीछे कोई राजनीतिक रणनीति छिपी हुई है।

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