राजस्थान के मुख्य सचिव की शिकायत पर पत्रकार महेश झालानी के खिलाफ FIR दर्ज।
क्या आलोचनात्मक लेख लिखना अपराध? पत्रकार पर FIR से उठे बड़े सवाल।

राजस्थान के मुख्य सचिव की शिकायत पर पत्रकार महेश झालानी के खिलाफ FIR दर्ज, प्रशासनिक गलियारों में मचा हड़कंप
राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी और पत्रकारिता जगत से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की शिकायत पर वरिष्ठ पत्रकार महेश झालानी के खिलाफ जयपुर शहर (दक्षिण) के अशोक नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

एफआईआर संख्या 0153/2026 दिनांक 08 मई 2026 को दर्ज हुई, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 336(4), 356(2), 353(2), 352 तथा आईटी एक्ट की धारा 66D लगाई गई है।
दस्तावेजों के अनुसार आरोप है कि पत्रकार महेश झालानी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक/मेटा पर प्रकाशित एक लेख में मुख्य सचिव एवं राज्य प्रशासन की छवि को भ्रामक और अपमानजनक तरीके से प्रभावित करने का प्रयास किया गया। गृह विभाग के निर्देश के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने पत्रकारिता जगत में गंभीर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या किसी पत्रकार द्वारा लिखे गए आलोचनात्मक लेख पर सीधे आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज होना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव माना जाएगा, या फिर प्रशासन अपनी छवि को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।
मुख्य सचिव जैसे राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी द्वारा किसी पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाना बेहद असाधारण और संवेदनशील घटनाक्रम माना जा रहा है। मामला अब केवल एक एफआईआर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासन और स्वतंत्र पत्रकारिता के बीच बढ़ते तनाव की बड़ी बहस बनता जा रहा है।
राजनीतिक और मीडिया गलियारों में इस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई वरिष्ठ पत्रकार इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय मान रहे हैं। वहीं प्रशासनिक हलकों में इसे सरकारी छवि और संस्थाओं की गरिमा से जोड़कर देखा जा रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह मामला केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित रहेगा या आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और मीडिया जगत में बड़ा विवाद खड़ा करेगा।



