जांच की दस्तक हुई तो फिर खुल गई परतें, सवाल वही पुराने और जवाब अब भी अधूरे।
मरीजों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप।

बार-बार कमियां मिलना सिर्फ इत्तेफाक नहीं लगता, कहीं न कहीं सिस्टम का डर कमजोर दिखता।
दौसा/सिकंदरा क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों और सवालों के केंद्र में आ गई है। सोमवार को डीडीसी इंचार्ज संदीप शारदा एवं बीसीएमएचओ देवेंद्र कुमार सामरिया के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिकंदरा स्थित लोधी हॉस्पिटल और शिवाय हॉस्पिटल में गहन जांच कार्रवाई को अंजाम दिया। जांच के दौरान अस्पतालों की व्यवस्थाओं, दस्तावेजों, दवा स्टॉक और संचालन प्रणाली की बारीकी से पड़ताल की गई।
हालांकि कार्रवाई दोनों अस्पतालों में हुई, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चाएं और सवाल एक बार फिर लोधी हॉस्पिटल को लेकर सामने आए। सूत्रों के मुताबिक जांच टीम को अस्पताल की कई व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां और अनियमितताएं देखने को मिलीं, जिसके बाद क्षेत्र में अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब लोधी हॉस्पिटल सवालों के घेरे में आया हो। इससे पूर्व भी स्वास्थ्य विभाग और सीएमएचओ टीम की कार्रवाई के दौरान ऑपरेशन थिएटर से एक्सपायर डेट दवाइयां बरामद होने सहित कई गंभीर कमियां सामने आई थीं। उस समय भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सुधार और सख्त कार्रवाई के बड़े दावे किए गए थे, लेकिन ताजा जांच के बाद फिर वही सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर बार-बार कमियां मिलने के बावजूद व्यवस्थाओं में स्थायी सुधार क्यों नहीं हो पा रहा।
समाज सेवी प्रदीप शर्मा का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी समाज की सबसे संवेदनशील व्यवस्था होती हैं और यदि मरीजों की जिंदगी से जुड़े संस्थानों में लगातार अनियमितताएं सामने आएं तो यह बेहद गंभीर विषय है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है, जबकि जमीन पर हालात जस के तस बने रहते हैं।
वहीं क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जिन अस्पतालों में लगातार शिकायतें और अनियमितताएं सामने आ रही हैं, वहां केवल चेतावनी देकर मामला शांत करने के बजाय नियमों के तहत कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि आमजन का स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा कायम रह सके।
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग की यह ताजा कार्रवाई वास्तव में सुधार की दिशा में बड़ा कदम साबित होती है या फिर पहले की तरह फाइलों और रिपोर्टों तक ही सीमित रह जाती है।



