“जब एक डॉक्टर पर आतंक का साया पड़ा — हमें क्या सीख लेनी चाहिए?”
“डॉक्टर साहब को क्यों ले गए?” — सहारनपुर में लोगों के बीच गूंजता सवाल

आज मैं आपके सामने एक ऐसी घटना पर बोल रहा हूँ, जिसने पूरे सहारनपुर को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
एक डॉक्टर — जिसने जीवन की रक्षा की शपथ ली थी — आज उसी समाज की शांति के खिलाफ कदम उठाने के आरोप में गिरफ्तार हुआ है।
हम सब जानते हैं, श्रीनगर पुलिस ने सहारनपुर में छापा मारकर डॉ. आदिल अहमद राठर को पकड़ा। उस पर आरोप है कि उसने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाए।
सोचिए, जब एक शिक्षित व्यक्ति गलत दिशा में कदम रखता है, तो वह सिर्फ कानून नहीं तोड़ता, समाज के भरोसे को भी तोड़ देता है।
मित्रों,
यह घटना सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं है, यह चेतावनी है — कि कट्टरपंथ की जड़ें किसी भी पेशे, किसी भी स्थान पर पहुँच सकती हैं।
हमें सतर्क रहना होगा, अपने आसपास हो रही गतिविधियों पर नजर रखनी होगी।
शिक्षा तभी सार्थक है जब वह विवेक देती है, विनाश नहीं।
मैं पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना करता हूँ।
और साथ ही, मैं युवाओं से कहना चाहता हूँ — किसी विचारधारा के नाम पर अपने विवेक को मत बेचो।
एक गलत कदम, न केवल तुम्हारा भविष्य बल्कि तुम्हारे परिवार की इज़्ज़त को भी मिटा सकता है।
आइए, इस घटना से हम सब सीख लें —
राष्ट्र की एकता, शांति और सुरक्षा सबसे ऊपर है।
हम सबको मिलकर यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी तरह की कट्टर सोच हमारे समाज में पनप न सके।
जय हिंद!



