क्राइम समाचार

रेगिस्तान में छुपी थी मौत की फैक्ट्री, आधी रात पुलिस का सीक्रेट ऑपरेशन… 90 करोड़ की MD ड्रग्स फैक्ट्री ध्वस्त।

176 किलो MD ड्रग्स के साथ शातिर गिरोह गिरफ्तार, कई राज्यों से लिंक।

 फैक्ट्री की सुरक्षा कर रहा था हथियारबंद आरोपी, पुलिस पर की फायरिंग।

एडिटर इन चीफ मनोज कुमार सोनी। जयपुर/बाड़मेर: राजस्थान में नशे के कारोबार पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक सामने आई है। पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने ‘ऑपरेशन विषग्रहण’ के तहत बालेसर क्षेत्र के सुनसान खेत में चल रही MD ड्रग्स फैक्ट्री का पर्दाफाश कर दिया। इस दौरान पुलिस और तस्करों के बीच मुठभेड़ हुई तथा कई राज्यों में फैले नेटवर्क से जुड़े 6 आरोपियों को दबोच लिया गया। पुलिस के अनुसार गिरोह बेहद शातिर था। सदस्य आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते थे और लोकेशन छिपाने के लिए केवल एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर संपर्क रखते थे।

लंबे समय तक निगरानी के बाद पुलिस ने इस हाई-रिस्क ऑपरेशन को अंजाम दिया। गिरोह का सरगना 28 वर्षीय हापू राम बताया जा रहा है, जो पहले डोडा चूरा तस्करी में सक्रिय था। जेल से बाहर आने के बाद उसने खुद का नेटवर्क खड़ा किया और पुराने साथियों को जोड़कर MD ड्रग्स का धंधा शुरू किया। पुलिस को उसके नेटवर्क की भनक सोशल मीडिया गतिविधियों से लगी, जिसके बाद डेढ़ महीने तक गुप्त निगरानी की गई।

25 अप्रैल की आधी रात ANTF की टीम जोधपुर से रवाना हुई और करीब 1 बजे बालेसर पहुंची। फैक्ट्री आबादी से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर ऊंचाई पर बने अधूरे ढांचे में संचालित हो रही थी। तस्करों को भनक न लगे, इसलिए पुलिस जवानों को करीब 3 घंटे तक रेंगते हुए वहां तक पहुंचना पड़ा।

पुलिस ने घेराबंदी कर आत्मसमर्पण को कहा तो हापू राम और सुरक्षा प्रभारी अर्जुन ने छत से फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई और चेतावनी के बाद दोनों को काबू कर लिया गया। भागने की कोशिश में हापू राम घायल हो गया, जबकि अर्जुन से हथियार बरामद किया गया। छापे के दौरान पुलिस ने अधूरी इमारत के भीतर से करीब 176 किलो MD ड्रग्स जब्त की, जिसे सुखाकर आगे सप्लाई किया जाना था। इसकी अनुमानित अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 90 करोड़ रुपये आंकी गई है।

सप्लाई चेन से खुला राज।

पुलिस के लिए लोकेशन ट्रेस करना आसान नहीं था, क्योंकि आरोपी मोबाइल टावर से बचने के तरीके अपनाते थे। इसके बाद जांच एजेंसियों ने केमिकल और “आइस” सप्लाई चेन पर नजर रखी, जिससे फैक्ट्री तक पहुंचने में सफलता मिली। राजस्थान बना तस्करों का निशाना प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि केमिकल्स गुजरात और महाराष्ट्र से लाए जाते थे, जबकि जोधपुर, सांचौर, बाड़मेर और जालौर के सुनसान इलाकों में ड्रग्स तैयार होती थी। फिर इसे अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किया जाता था। पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 33 MD ड्रग फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं, जिनमें अधिकांश पश्चिमी राजस्थान के जिलों से मिली हैं। यह कार्रवाई नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी चेतावनी मानी जा रही है।

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