शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला, जिससे सेंसेक्स 600 अंक टूटकर 82,700 पर आ गया।

7 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 600 अंक टूटकर 82,700 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी भी 150 अंक फिसलकर 25,300 पर पहुंच गया। बैंकिंग, ऑटो और आईटी शेयरों में जबरदस्त बिकवाली से निवेशकों की पूंजी में भारी गिरावट आई। वैश्विक स्तर पर भी बाजारों का रुख नकारात्मक है। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई इंडेक्स 2.16% गिरकर 49,783 पर और कोरिया का कोस्पी 2.49% गिरकर 3,926 पर ट्रेड कर रहा है।
गौर करने योग्य है कि अक्टूबर में एफपीआई ने करीब 14,610 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जबकि सितंबर में उन्होंने 35,000 करोड़ से अधिक की बिकवाली की थी। ऐसे में नवंबर की शुरुआत फिर से नकारात्मक संकेतों के साथ होना निवेशकों के भरोसे को तोड़ सकता है। पिछले सत्र में भी बाजार लाल निशान पर बंद हुआ था—सेंसेक्स 83,311 और निफ्टी 25,509 पर। यह लगातार दूसरी गिरावट है।
बैंकिंग सेक्टर में सबसे अधिक दबाव निजी बैंकों पर देखा गया। ऑटो सेक्टर में मुनाफावसूली का दौर जारी रहा जबकि आईटी कंपनियों के शेयर वैश्विक मंदी की आशंकाओं से प्रभावित रहे। मेटल और मीडिया शेयर भी कमजोर स्तर पर कारोबार करते दिखे, जिससे बाजार की चौड़ाई घट गई।
आज की गिरावट यह संकेत दे रही है कि निवेशक फिलहाल जोखिम से बचना चाह रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था की मंदी की आशंका, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और चीन की धीमी रिकवरी जैसी वजहों ने बाजार भावना को प्रभावित किया है। जब तक वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकती नहीं, तब तक भारतीय बाजारों में स्थिरता लौटना मुश्किल दिखता है।



