राष्ट्रीय

भर्ती नीति को लेकर कोरबा में उग्र हुए क्रांति सेना के प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।

सुबह-सुबह पश्चिम क्षेत्र में उबाल—कंपनी गेट पर क्रान्ति सेना का जमावड़ा

स्थानीय युवाओं की नौकरी की लड़ाई शनिवार की सुबह अचानक तेज हो उठी। क्रान्ति सेना के सैकड़ों कार्यकर्ता निजी कंपनी के गेट पर पहुंचकर नारेबाज़ी करने लगे।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई—सभी बसों में भरकर थाने रवाना

गेट जाम शुरू होते ही पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया। कुछ ही मिनटों में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में भरा गया और कुसमुंडा थाना भेज दिया गया।

कंपनी पर ‘झूठे वादे’ का आरोप

सदस्यों का आरोप है कि कंपनी ने स्थानीय वाहन चालकों को प्राथमिकता देने की बात कही थी, लेकिन न तो सत्यापन कराया गया, न नियुक्ति की। उल्टा अन्य राज्यों के चालक लगातार बुलाए जा रहे हैं।

थाने के बाहर भी जुटने लगे समर्थक

जैसे ही हिरासत की खबर फैली, क्रान्ति सेना के अन्य सदस्य थाने के बाहर एकत्र होना शुरू हो गए। पुलिस हर गतिविधि पर कड़ी नज़र रख रही है।

स्थानीय रोजगार के लिए ‘निर्णायक लड़ाई’ का दावा

युवाओं का कहना है कि समय आ गया है जब रोजगार के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। नीलकंठ कंपनी समेत कई स्थानों पर स्थानीय युवाओं की उपेक्षा होने का आरोप लगातार उठ रहा है।

संगठन की चेतावनी—आंदोलन और उग्र हो सकता है

क्रान्ति सेना ने कहा कि यदि रोज़गार मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया, तो यह सिर्फ शुरुआत है।

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